निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तर को रगंइए —
- दो एकसमान कममानियाँ P तथा Q के कमानी स्थिरांक क्रमशः Kp तथा Kq हैं और Kp > Kq है। प्रथम बार (‘a’ स्थिति में) दोनों को समान लम्बाई से तथा दूसरी बार (‘b’ स्थिति में) समान बल से, खींचा जाता है। यदि इन दोनों कमानियों द्वारा किए गए कार्य क्रमशः Wp तथा Wq हों, तो स्थिति (a) तथा स्थिति (b) में इनके बीच क्रमशः संबंध होंगे:
- Wp < Wq; Wq < Wp
- Wp = Wq; Wp = Wq
- Wp = Wq; Wp > Wq
- Wp > Wq; Wq > Wp
- किसी बल क्षेत्र में कण की स्थितिज ऊर्जा निम्नलिखित है:
जहाँ तथा धनात्मक नियतांक हैं तथा कण की बल क्षेत्र के केन्द्र से दूरी है। स्थायी संतुलन की दशा में कण की दूरी होगी: - यदि एक वस्तु की गतिज ऊर्जा में 300% की वृद्धि होती है, तो उसके संवेग में प्रतिशत परिवर्तन का मान होगा:
- 100%
- 73.2%
- 265%
- 150%
- पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रत्यावस्थान गुणांक (
) का मान होता है:- −1
- 0
- 1
- m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो गोले A तथा B आपस में टकराते हैं, प्रारंभ में A विराम अवस्था में है और B वेग v से x-अक्ष के अनुदिश गतिमान है। टक्कर के पश्चात् B का वेग उसके प्रारम्भिक वेग की लम्बवत् दिशा में
हो जाता है। टक्कर के पश्चात् गोले A की गति की दिशा होगी:- x-अक्ष से कोण θ = tan−1 (1/2) पर
- B की दिशा के विपरीत
- वही जो B की है।
- x-अक्ष से कोण θ = −1(−1/2)$ पर
- किसी संरक्षी निकाय (conservative system) की स्थितिज ऊर्जा U यदि सूत्र U = ax2 − bx से व्यक्त हो, जहाँ a तथा a नियतांक हों, तो निकाय पर लगनेवाले बल F के लिए जो व्यंजक मान्य होगा, वह है—
- F = नियत
- F = b − 2ax
- F = bx − 2a
- F = 2ax
- 400 ms−1 के क्षैतिज वेग से चलती हुई 10 g द्रव्यमान की एक गोली, 2 kg द्रव्यमान के लकड़ी के एक गुटके से टकराती है। यह गुटका एक 5 m लम्बी हल्की अवितान्य डोरी से लटका है। यदि गोली के टकराने के परिणामस्वरूप गुटके का गुरुत्व केन्द्र 10 cm ऊर्ध्वाधर ऊपर उठ जाता है, तो गुटके से क्षैतिज दिशा में बाहर निकलने पर गोली की चाल होगी:
- 100 मीटर/सेकण्ड
- 120 मीटर/सेकण्ड
- 80
- 160 मीटर/सेकण्ड
- किसी घर्षणहीन पृष्ठ पर v चाल से चलता हुआ M द्रव्यमान का एक ब्लॉक, विरामावस्था में स्थित एक अन्य समान द्रव्यमान M के ब्लॉक से टकराता है। टक्कर के पश्चात् पहला ब्लॉक
चाल से, अपनी प्रारम्भिक गति की दिशा से θ कोण पर चलने लगता है, तो टक्कर के पश्चात् दूसरे ब्लॉक की चाल होगी: - एक गोला 20 मीटर की ऊँचाई से, प्रारम्भिक वेग
द्वारा सीधे (ऊर्ध्वाधर) नीचे की ओर फेंका जाता है। यह गोला भू-तल से टकराता है, इस टक्कर में इसकी 50% ऊर्जा क्षयित हो जाती है। भू-तल से टकराने के बाद यह गोला उसी ऊँचाई तक उछल आता है। यदि g = 10 ms^−2 है, तो गोले का प्रारम्भिक वेग है:- 20 ms−1
- 28 ms−1
- 14 ms−1
- 10 ms−1
- दो सदिशों
और के बीच का कोण होगा:- शून्य
- 180°
- 45°
- 90°
- 3 kg द्रव्यमान के एक पिण्ड पर एक स्थिर बल क्रियारत है जिससे इसका स्थान विचलन s (मीटरों में) सम्बन्ध s =
t2, द्वारा व्यक्त किया गया है, जहाँ t का मान सेकण्डों में है। इस बल द्वारा 2 सेकण्ड में किया गया कार्य होगा: J J J J
- एक कण, नियत बल
N के कारण क्षैतिज रूप से वेग ms−1 के साथ गति करता है। कण को आपूर्ति की गई तात्क्षणिक शक्ति है-- 100 W
- 140 W
- शून्य
- 200 W
- चाल
से गतिमान द्रव्यमान का कोई पिण्ड A विराम में स्थित द्रव्यमान के किसी पिण्ड B से आमने सामने सीधे प्रत्यास्थ प्रकृति का संघट्ट करता है। संघट्ट के पश्चात् संघट्ट करने वाले पिण्ड A की क्षयित ऊर्जा का भाग है: - एक पम्प मशीन 2 किलोवाट की है। यह 1 मिनट में 10 मी ऊँचाई तक कितना पानी पम्प करेगी?
- 100 लीटर
- 1000 लीटर
- 2000 लीटर
- 1200 लीटर
- 1 J बराबर होता है:
- 1 hp × 1 m
- 1 N × 1 cm
- 1 kg × 1 m
- 1 N × 1 m
- 1 hp × 1 m
- विरामावस्था में, 5 m द्रव्यमान का एक कण अपने आप अचानक से तीन टुकड़ों में टूट जाता है। m द्रव्यमान के दो टुकड़े एक दूसरे के लंबवत प्रत्येक v चाल से गति करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मुक्त ऊर्जा है:
mv2 mv2 mv2 mv2
- एक बच्चा झूले में झूल रहा है। यदि भूमितल से झूले की न्यूनतम ऊँचाई 0.75 मीटर व अधिकतम ऊँचाई 2 मीटर है, तो उसकी अधिकतम चाल होगी:
- 15 m/s
- 5 m/s
- 10 m/s
- 8 m/s
- यदि किसी पिंड पर F बल लगाया जाए और वह v वेग से चले तो उसकी शक्ति होगी—
- F × v
- F × v2
- गतिमान कण की गतिज ऊर्जा-विस्थापन वक्र की ढाल (slope) है:
- त्वरण के व्युत्क्रमानुपाती
- त्वरण के सीधा समानुपाती
- कण के त्वरण के बराबर
- इनमें कोई नहीं
- त्वरण के व्युत्क्रमानुपाती
- एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग मेज से खड़ा जोड़ा जुड़ा हुआ है। इसका बल नियतांक k है। द्रव्यमान m के एक गोले को स्प्रिंग के मुक्त सिरे के ठीक ऊपर से ऊँचाई
से गिराने पर स्प्रिंग d दूरी तक संपीड़ित हो जाती है। इस प्रक्रम में हुआ शुद्ध कार्य होगा:- mg(h − d) +
kd2 - mg(h + d) −
kd2 - mg(h − d) −
kd2 - mg(h + d) +
kd2
- mg(h − d) +
- v वेग से क्षैतिज रूप से (x-अक्ष के अनुदिश) गतिशील m द्रव्यमान, 2v वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर (y-अक्ष के अनुदिश) गतिशील 3 m द्रव्यमान से टकराने के पश्चात् उससे चिपक जाता है। संयोजन का अन्तिम वेग है:
- किसी वस्तु के संवेग (momentum) को तिगुना करने से उसकी गतिज ऊर्जा हो जाएगी—
- दुगुनी
- चौगुनी
- तिगुनी
- नौगुनी
- दुगुनी
- 4 m द्रव्यमान का एक पिण्ड (वस्तु) x − y समतल पर विराम अवस्था में है। इसमें अचानक विस्फोट होने पर इसके दो भाग, (जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान ‘m’ है) एक ही वेग ‘v’ से एक दूसरे की लम्बवत् दिशा में गति करने लगते हैं, तो विस्फोट के कारण जनित कुल गतिज ऊर्जा का मान होगा:
- 4mv2
mv2- mv2
- 2mv2
- एक लम्बे स्प्रिंग को खींचने पर जब उसकी लम्बाई 2 सेमी. बढ़ जाती है, तब उसकी स्थितिज ऊर्जा U है। यदि स्प्रिंग को खींचकर उसकी लम्बाई 10 सेमी. बढ़ा दी जाए, तब उसमें संचित स्थितिज ऊर्जा होगी:
- 25 U
- U/5
- 5 U
- 10/U
- एक इलेक्ट्रॉन एवं एक प्रोटॉन पारस्परिक बलों के प्रभाव से गतिमान हैं। गति के दौरान इस तंत्र की गतिज ऊर्जा के परिवर्तन की गणना करते समय हम एक के द्वारा दूसरे पर लगने वाले चुंबकीय बलों की उपेक्षा कर देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि,
- चुंबकीय बल अनिवार्यतः नगण्य होते हैं।
- चुंबकीय बल प्रत्येक कण पर बराबर (परंतु शून्येतर) और विपरीत कार्य करते हैं।
- चुंबकीय बल इन दोनों में से किसी भी कण पर कोई कार्य नहीं करते।
- दोनों चुंबकीय बल परिमाण में बराबर और दिशाओं में विपरीत होते हैं इसलिए वे कोई नेट (परिणामी) प्रभाव उत्पन्न नहीं करते।
- कुल ऊर्जा E के साथ एक कण एक स्थितिज ऊर्जा क्षेत्र U(x) में गति कर रहा है। क्षेत्र में कण की गति प्रतिबंधित होती है, जब
- U(x) ≤ E
- U(x) < E
- U(x) = 0
- U(x) > E
- किसी लंबे स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा
है, जब इसे 2 cm खींचा जाता है। यदि स्प्रिंग को 8 cm खींचा जाये, तो इसे संचित स्थितिज ऊर्जा होगी:- 2 U
- 16 U
- 4 U
- 8 U
- एक प्रोटॉन विरामअवस्था में रखा गया है। इसके क्षेत्र में एक अन्य धन आवेशयुक्त कण, इससे d दूरी पर विराम अवस्था में ही विमुक्त किया जाता है। दो प्रयोगों पर विचार कीजिए— पहला वह जिसमें दूसरा आवेशित कण भी प्रोटॉन ही है और दूसरा वह जिसमें दूसरा धन आवेशित कण पॉज़िट्रॉन है। समान समय t में दोनों गतिमान कणों पर किया गया कार्य—
- पॉज़िट्रॉन के प्रकरण में कम होता है क्योंकि पॉज़िट्रॉन अधिक तीव्र गति से प्रतिकर्षित होता है और उस पर बल कम हो जाता है।
- पॉज़िट्रॉन के प्रकरण में अधिक होता है क्योंकि पॉज़िट्रॉन अधिक दूरी तक प्रतिकर्षित होता है।
- उतना ही होता है जितना आवेशित कण द्वारा स्थिर प्रोटॉन पर किया गया कार्य।
- समान है क्योंकि इन दो प्रयोगों में एक ही बल नियम लागू होता है।
- समान द्रव्यमान के दो पिण्ड A व B पूर्णतया अप्रत्यास्थ एक विमीय संघट्ट करते हैं। संघट्ट से पूर्व पिण्ड A वेग v1 से गति करता है जबकि पिण्ड B विराम में है। संघट्ट के पश्चात् निकाय का वेग v2 है। अनुपात v1 : v2 है:
- 4 : 1
- 2 : 1
- 1 : 4
- 1 : 2
- 3 g के एक कण पर एक बल इस प्रकार कार्य करता है कि t के फलन के रूप में कण की स्थिति x = 3t − 4t2 + t3 द्वारा व्यक्त की जाती है, जहाँ x मीटर में तथा t सेकण्ड में है। प्रथम 4 सेकण्ड के दौरान किया गया कार्य है:
- 450 mJ
- 240 mJ
- 490 mJ
- 530 mJ
- एक रबड़ की गेंद 5 मीटर ऊँचाई से एक समतल पर गिरती है और उछलकर यह 1.8 मीटर वापस ऊपर जाती है। उछलने पर गेंद के वेग में कितने घटक की कमी होगी?
- 9/25
- 2/5
- 3/5
- 16/25
त्रिज्या के किसी ऊर्ध्वाधर पाश (लूप) में m द्रव्यमान के किसी पिण्ड को किस निम्नतम वेग से प्रवेश करना चाहिए कि वह पाश को पूर्ण कर सके?- दो सर्वसम गेंदों A तथा B के वेग क्रमशः 0.5 m/s तथा − 0.3 m/s हैं। ये एक रेखा के अनुदिश चलते हुए टकराती हैं। यदि यह टक्कर प्रत्यास्थ है, तो इस टक्कर के पश्चात् B तथा A के वेग होंगे, क्रमशः
- − 0.5 मीटर/सेकण्ड तथा 0.3 मीटर/सेकण्ड
- − 0.3 मीटर/सेकण्ड तथा 0.5 मीटर/सेकण्ड
- 0.3 मीटर/सेकण्ड तथा 0.5 मीटर/सेकण्ड
- 0.5 मीटर/सेकण्ड तथा − 0.3 मीटर/सेकण्ड
- किसी कण पर y-दिशा में कोई बल F = 20 + 10y कार्य कर रहा है, यहाँ F न्यूटन में तथा y मीटर में है। इस कण को y = 0 से y = 1 m तक गति कराने में किया गया कार्य है:
- 30 J
- 20 J
- 5 J
- 25 J
- एक m द्रव्यमान के पिण्ड का वेग 3 किमी/घण्टा है। यह एक स्थिर
द्रव्यमान के पिण्ड के साथ संघट्ट करती है और चिपक जाती है, तो संयुक्त द्रव्यमान का संघट्ट के बाद वेग होगा:- 4 किमी/घण्टा
- 2 किमी/घण्टा
- 1 किमी/घण्टा
- 3 किमी/घण्टा
- एक ब्लॉक जिसका द्रव्यमान 5 kg है एक रूक्ष क्षैतिज तल पर रखा है। यदि संपर्क सतहों के बीच घर्षण गुणांक 0.2 हो और ब्लॉक को 25 N के क्षैतिज बल द्वारा 10 m की दूरी से खिसकाया जाए तो ब्लॉक द्वारा प्राप्त गतिज ऊर्जा होगी—
- 220 J
- 100 J
- 152 J
- 50 J
- M द्रव्यमान का एक पिण्ड वृत्तीय पथ पर एक समान चाल v से चलता है। वृत्तीय पथ की त्रिज्या
है। जब यह एक बिन्दु से व्यास के दूसरे बिन्दु पर पहुँचता है तो:- संवेग नहीं बदलेगा।
- संवेग 2Mv से बदल जाएगा।
- गतिज ऊर्जा Mv2 / 4 से बदल जाएगा।
- गतिज ऊर्जा Mv2 से बदल जाएगी।
- एक पिंड निर्वात में केवल गुरुत्व के अधीन स्वतंत्रतापूर्वक गिर रहा है। इसके गिरने के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सी राशि अचर रहती है?
- गतिज ऊर्जा
- कुल यांत्रिक ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा
- कुल रेखीय संवेग
- एक ऊर्ध्वाधर स्प्रिंग के निचले सिरे पर M द्रव्यमान का एक पिण्ड बंधा है। स्प्रिंग एक छत से लटका है तथा उसके बल नियतांक का मान k है। जब पिण्ड को मुक्त छोड़ा गया तो यह विराम अवस्था में था और स्प्रिंग बिना खिंचाव के था। स्प्रिंग की लम्बाई में अधिकतम वृद्धि होगी:
- Mg/2k
- Mg/k
- 2Mg/k
- 4Mg/k
- 2 किग्रा द्रव्यमान की एक धातु की बॉल 36 किमी/घण्टा से चलती हुई 3 किलोग्राम के एक स्थिर बॉल से सीधा संघट्ट करती है। यदि संघट्ट के बाद दोनों बॉल साथ चलें, तो संघट्ट के दौरान गतिज ऊर्जा में हुई कमी का मान है:
- 140 J
- 100 J
- 60 J
- 40 J
- एक पिण्ड 5 N बल के प्रभाव के अंतर्गत एक सरल (सीधी) रेखा के अनुदिश 10 m की दूरी तय करता है। यदि किया गया कार्य 25 J है, तो बल और पिण्ड की गति की दिशा के बीच कोण है:
- 30°
- 75°
- 45°
- 60°
- एक टरबाइन को चलाने के लिये 60 मीटर की ऊँचाई से 15 kg/s की दर से पानी गिराया जा रहा है। घर्षण बलों के कारण ऊर्जा का 10% नष्ट हो जाता है। टरबाइन कितनी शक्ति (पावर) उत्पन्न करती है? (g = 10 m/s2)
- 12.3 kW
- 10.2 kW
- 7.0 kW
- 8.1 kW
- एक टरबाइन को चलाने के लिए 15 किग्रा/से. की दर से 60 मी. ऊँचाई से पानी गिरता है। घर्षण के कारण प्रारम्भिक निवेशी ऊर्जा के 10 प्रतिशत की हानि होती है। टरबाइन के द्वारा कितनी शक्ति उत्पन्न की जाती है? (g = 10 मी./से.2)
- 7.0 किलोवाट
- 8.1 किलोवाट
- 10.2 किलोवाट
- 12.3 किलोवाट
- एक हल्की वस्तु A एवं भारी वस्तु B के रैखिक संवेग समान हैं, तब— [Board Model]
- A की गतिज ऊर्जा B के बराबर होगी
- A की गतिज ऊर्जा B से कम होगी
- A की गतिज ऊर्जा B से अधिक होगी
- इनमें कोई नहीं
- A की गतिज ऊर्जा B के बराबर होगी
- एक कण पृथ्वी सतह से S ऊँचाई से गिराया जाता है। कुछ निश्चित ऊँचाई पर इसकी गतिज ऊर्जा इसकी स्थितिज ऊर्जा की तीन गुना होती है। इस क्षण कण की पृथ्वी सतह से ऊँचाई तथा कण की चाल होती है :
, , , ,
- 10 ग्राम द्रव्यमान का कोई कण 6.4 सेमी. लम्बी त्रिज्या के वृत्त के अनुदिश किसी नियत स्पर्श-रेखीय त्वरण से गति करता है। यदि गति आरम्भ करने के पश्चात् दो परिक्रमाएँ पूरी करने पर कण की गतिज ऊर्जा 8 × 10−4 J हो जाती है, तो इस त्वरण का परिमाण होगा:
- 0.1 m/s2
- 0.2 m/s2
- 0.15 m/s2
- 0.18 m/s2
- m1 और m2 द्रव्यमान के दो कणों के वेग क्रमशः v1 और v2 हैं। दोनों के संवेग बराबर हैं, परन्तु उनकी विभिन्न गतिज ऊर्जाएँ क्रमशः E1 और E2 हैं। यदि m1 > m2 हो, तो:
- E1 = E2
- E1 > E2
=- E1 < E2
- जमीन पर उकड़ू बैठा हुआ एक व्यक्ति उठकर सीधा खड़ा होता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति पर लगने वाला पृथ्वी का प्रतिक्रिया बल—
- अपरिवर्तित रहता है और परिमाण में mg के बराबर होता है।
- अपरिवर्तित रहता है और परिमाण में mg से अधिक होता है।
- प्रारंभ परिवर्ती परंतु परिमाण में सदैव mg से अधिक
- प्रारंभ में mg से अधिक होता है परंतु बाद में mg के बराबर हो जाता है।
- बल एवं विस्थापन दोनों सदिश हैं, तो कार्य जो बल एवं विस्थापन का गुणनफल है:
- न तो सदिश है और न अदिश
- सदिश है
- अदिश है
- केवल संख्या है
- दो कण A तथा B स्थिर वेग क्रमशः
तथा से गति कर रहे हैं। प्रारम्भिक क्षण में उनके स्थिति सदिश क्रमशः तथा हैं, तो A तथा B के संघट्ट होने के लिये प्रतिबन्ध है कि: - किसी कण का द्रव्यमान 2 किग्रा है। इस कण पर
न्यूटन का एकसमान बल लगता है। जो उसे उसकी स्थिति मीटर से मीटर स्थिति में विस्थापित कर देता है। इस बल द्वारा किया गया कार्य है:- 6 J
- 13 J
- 15 J
- 9 J
- एक कण को क्षैतिज से 45° के कोण पर फेंका जाता है, तो उसकी उच्चतम बिन्दु पर गतिज ऊर्जा क्या होगी, यदि इसकी प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा K है?
- 2K
- K
- 1 kg द्रव्यमान का कोई पिण्ड किसी कालाश्रित बल
N, जहाँ और , x तथा y अक्ष के अनुदिश मात्रक सदिश हैं, के अधीन गति आरम्भ करता है, तो समय t पर इस बल द्वारा विकसित शक्ति क्या होगी?- (2t2 + 3t5) W
- (2t2 + 3t3) W
- (2t2 + 3t4) W
- (2t3 + 4t4) W
- जब एक पिण्ड किसी वृत्त के अनुदिश एक नियत चाल से गति करता है, तो
- इस पर कोई कार्य नहीं किया जाता है।
- इसमें कोई त्वरण उत्पन्न नहीं होता है।
- इसका वेग नियत रहता है।
- इस पर कोई बल कार्य नहीं करता है।
- किसी क्षण t पर 5 N बल के अंतर्गत किसी कण का विस्थापन 2t − 1 (SI मात्रक में) दिया गया है। क्षणिक शक्ति का मान (SI मात्रक में) है-
- 6
- 5
- 10
- 7
- 2 मीटर/सेकण्ड की चाल से गति करती हुई गेंद अपने से दोगुने द्रव्यमान वाली एक अन्य स्थिर गेंद के सम्मुख टकराती है। यदि प्रत्यावस्थान गुणांक 0.5 है, तब टकराने के बाद उनके वेग (मीटर/सेकण्ड में) होंगे:
- 1, 0.5
- 0, 1
- 1, 1
- 0, 2
- किसी व्यक्ति का हृदय, धमनियों से 150 mm पारद दाब पर 5 लीटर रक्त प्रति मिनट पम्प करता है। यदि, पारद का घनत्व $13.6 3 kg/m3 तथा g = 10 m/s2 है, तो हृदय की शक्ति वाट में है:
- 1.50
- 2.35
- 1.70
- 3.0
- यदि 2 किग्रा की वस्तु पर एक विस्थापन-सम्बद्ध बल (7 − 2x + 3x2) N कार्य करके इसे x = 0 से x = 5 मी तक विस्थापित करता है, तो किया गया कार्य (जूल में) है:
- 35
- 270
- 70
- 135
- किसी पतले तार से जुड़े द्रव्यमान m को किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में तीव्रता से घुमाया जा रहा है। इस तार के टूटने की अधिक संभावना तब है जब
- द्रव्यमान उच्चतम बिन्दु पर हो।
- द्रव्यमान निम्नतम बिन्दु पर हो।
- तार क्षैतिज हो।
- तार ऊर्ध्वाधर से 60° के झुकाव पर हो।
- एक बाइसिकल सवार ब्रेक लगाने के बाद 10 m की दूरी फिसलते हुए जा सकता है। इस प्रक्रिया में सड़क द्वारा बाइसिकल पर लगाया गया बल 200 N है और गति के ठीक विपरीत दिशा में लगता है। साइकिल द्वारा सड़क पर किया गया कार्य है—
- शून्य
- − 200 J
- +2000 J
- − 20,000 J
- विराम अवस्था में स्थित M द्रव्यमान का एक कण, एकसमान त्वरण से गति प्रारंभ करता है। यदि t समय पश्चात् उस कण की चाल
हो जाती है, तो कण को दी गई शक्ति होगी: - दो कणों के द्रव्यमान क्रमशः m1 तथा m2 हैं। इनके प्रारम्भिक वेग क्रमशः u1 तथा u2 हैं। टक्कर के पश्चात् एक कण ε ऊर्जा अवशोषित कर उच्चतर स्तर तक उत्तेजित हो जाता है। यदि कणों के अन्तिम वेग क्रमशः v1 तथा v2 हों, तो
- m द्रव्यमान की एक गोली, M द्रव्यमान के एक गुटके से प्रत्यास्थपूर्ण से टकराती है। ऊर्जा का स्थानांतरण अधिकतम होता है, जब:
- दो पिण्ड जिनके द्रव्यमान m तथा 4 m हैं, उनकी गतिज ऊर्जाएँ बराबर हैं। इनके रेखीय संवेगों का अनुपात होगा:
- 1 : 2
- 4 : 1
- 1 : 4
- 2 : 1
- y-दिशा में गति करने को बाध्य एक पिण्ड
के एक बल के अधीन है। y-अक्ष के अनुदिश की दूरी से पिण्ड को गति कराने में इस बल द्वारा किया गया कार्य है:- 160 J
- 190 J
- 20 J
- 150 J
- ‘m’ द्रव्यमान के एक कण को एक मशीन द्वारा गतिमान किया (चलाया) जा रहा है। यदि इस मशीन की स्थिर शक्ति k वॉट है और यह कण विराम अवस्था से चलना प्रारम्भ करता है, तो t समय पर, कण पर लगा बल होगा :
t−2 t−1/2 t−1/2 t−1/2
- एक वस्तु विरामावस्था से d दूरी चलकर एकसमान बल के प्रभाव में गतिज ऊर्जा प्राप्त करती है। यदि वस्तु का द्रव्यमान m है, तो गतिज ऊर्जा निम्न में से किसके समानुपाती होगी?
- m
- m0
- दो द्रव्यमान m1 तथा m2 एक सरल रेखा में 3 मीटर/सेकण्ड तथा −5 मीटर/सेकण्ड से चलते हुए प्रत्यास्थ संघट्ट करते हैं। टकराने के बाद उनके वेग क्रमशः होंगे:
- −3 मीटर/सेकण्ड और +5 मीटर/सेकण्ड
- −4 मीटर/सेकण्ड और +4 मीटर/सेकण्ड
- −5 मीटर/सेकण्ड और −3 मीटर/सेकण्ड
- +4 मीटर/सेकण्ड दोनों के लिए
- जब एक लम्बे स्प्रिंग को 2 cm खींचा जाता है, तो इसमें संचित स्थितिज ऊर्जा
होती है। यदि इसे 8 cm खींचा जाए तो इसमें संचित स्थितिज ऊर्जा होगी:- 16 U
- 8 U
- 4 U
- कोई इंजन एक होजपाइप से निरन्तर जल को पम्प करता है। होजपाइप से जल, वेग v से निकलता है तथा जल धारा का प्रति एकांक लम्बाई द्रव्यमान m है। जल द्वारा प्राप्त की जाने वाली गतिज ऊर्जा की दर होगी:
m2 v2 mv3- mv3
mv2
- ‘l’ लम्बाई की एक डोरी के एक सिरे पर एक पत्थर को बाँध कर उसे एक लम्बवत्तिक वृत्ताकार पथ पर घुमाया जा रहा है जबकि डोरी का दूसरा सिरा वृत्त के केन्द्र पर स्थित रहता है। जिस क्षण यह पत्थर न्यूनतम स्थिति में होता है, तब इसका वेग ‘u’ होता है। जब डोरी क्षैतिज अवस्था में पहुँचती है, तो पत्थर के वेग में परिवर्तन का परिमाण (जबकि गुरुत्वीय त्वरण का मान g हो) होगा:
- u −
- 4 kg द्रव्यमान की एक तोप 200 ग्राम द्रव्यमान का एक गोला, विस्फोट द्वारा फेंकती है। विस्फोट से 1.05 kJ ऊर्जा उत्पन्न होती है। गोले का आरम्भिक वेग होगा:
- 80 ms−1
- 120 ms−1
- 100 ms−1
- 40 ms−1
- विराम अवस्था में स्थित एक 30 kg द्रव्यमान का बम अकस्मात् विस्फोटित होकर 18 kg और 12 kg के दो द्रव्यमानों में विभाजित हो जाता है। यदि 18 kg के द्रव्यमान का वेग 6 ms−1 हो, तो दूसरे द्रव्यमान की गतिज ऊर्जा होगी:
- 256 J
- 486 J
- 524 J
- 324 J
- 1 ग्राम द्रव्यमान की वर्षा के पानी की एक बूँद 1 km ऊँचाई से गिरती है और भू-तल से 50 m/s की चाल से टकराती है। यदि ‘g’ का मान 10 m/s2 स्थिर रहे तो, (i) गुरुत्वीय बल तथा (ii) वायु के प्रतिरोधक बल द्वारा किया गया कार्य होगा:
- (i) 10 J, (ii) −8.75 J
- (i) 100 J, (ii) 8.75 J
- (i) 1.25 J, (ii) −8.25 J
- (i) −10 J, (ii) −8.25 J
- किसी कण पर
न्यूटन बल लगाने पर वह बिन्दु से बिन्दु तक विस्थापित हो जाता है। इस प्रक्रिया में बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?- 11 J
- 2 J
- 5 J
- 8 J
- यदि सदिश
और समय के फलन हैं, तो t का वह मान जिस पर ये एक दूसरे के लंबवत होते हैं, है:- t =
- t =
- t = 0
- t =
- t =
- किसी निकाय की स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है। यदि:
- निकाय पर किसी संरक्षी बल द्वारा कार्य किया जाए।
- निकाय पर किसी असंरक्षी बल द्वारा कार्य किया जाए।
- निकाय द्वारा संरक्षी बल के विरुद्ध कार्य किया जाए।
- निकाय द्वारा असंरक्षी बल के विरुद्ध कार्य किया जाए।
- कार्य बराबर होता है—
- F × d
- F × d tan θ
- F × d sin θ
- F × d cos θ
- F × d
- 2 kg तथा 4 kg की गेंदों को एक ही समय पर एक 60 फुट ऊँची इमारत से एक साथ छोड़ा गया है। पृथ्वी की ओर 30 फुट गिरने पर उनकी क्रमानुसार गतिज ऊर्जाओं का अनुपात होगा:
- 1 : 4
: 1- 1 : 2
- 1 :
- कार्य के परिकलन में यदि W =
⋅ = 0 तथा F ≠ s ≠ 0 तब— तथा परस्पर विपरीत दिशाओं में होंगे तथा की दिशाएँ समांतर होंगी तथा परस्पर लंबवत होंगे- इनमें सभी कथन सही हैं
- विश्रामावस्था में रखा एक कण, विस्फोट के बाद m1 व m2 द्रव्यमान के दो कणों में टूट जाता है। विस्फोट के बाद ये कण विपरीत दिशाओं में v1 व v2 वेग से चलते हैं। उनकी गतिज ऊर्जाओं का अनुपात E1/E2 होगा:
- m1 v2 / m2 v1
- m2 / m1
- m1 / m2
- 1
- m द्रव्यमान की एक कार विरामावस्था से प्रारम्भ होकर इस प्रकार त्वरित होती है, कि कार को प्राप्त तात्क्षणिक शक्ति का स्थिर मान P0 है, तो इस कार का तात्क्षणिक वेग समानुपाती हो सकता है:
- t2 P0 के
- t1/2 के
- t
के - t−1/2 के
- 1 kg द्रव्यमान के एक पिंड को 20 m/s वेग से ऊपर फेंका गया है। 18 m की ऊँचाई प्राप्त करने पर यह क्षण भर को विराम धारण कर लेता है। वायु के घर्षण के कारण कितनी ऊर्जा का ह्रास होता है? (g = 10 m/s2)
- 30 J
- 40 J
- 20 J
- 10 J
- एक कण इस प्रकार गति करता है कि इसकी स्थिति सदिश
से व्यक्त किया जाता है, जहाँ ω एक नियतांक है। निम्नलिखित में से कौन-सा एक सत्य है?- वेग
के लंबवत है तथा त्वरण मूलबिन्दु की ओर निर्देशित है। - वेग तथा त्वरण दोनों
के लंबवत हैं। - वेग तथा त्वरण दोनों
के समांतर हैं। - वेग
के लंबवत है तथा त्वरण मूलबिन्दु से दूर निर्देशित है।
- वेग
- दो स्प्रिंग A तथा B जिनके बल नियतांक KA तथा KB (KA = 2KB) हैं। इन पर समान बल लगाकर खींचा गया है, यदि स्प्रिंग (A) में संचित ऊर्जा (E) है, तो स्प्रिंग (B) में संचित ऊर्जा होगी:
- 2E
- E/4
- 4E
- E/2
- पृथ्वी से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर प्रक्षेपित एक वस्तु, पृथ्वी पर वापस आने से पहले, पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर ऊँचाई तक पहुँचती है। गुरुत्वीय बल द्वारा लगाई गई शक्ति का मान सर्वाधिक होगा:
- वस्तु की सर्वोच्च स्थिति पर।
- वस्तु के पृथ्वी पर टकराने के ठीक पहले के क्षण पर।
- वस्तु को प्रक्षेपित करने के ठीक पश्चात् के क्षण में।
- वस्तु की पूरी यात्रा में स्थिर होगा।
- एक विद्युत लिफ्ट अपने अधिकतम भार 2000 kg (लिफ्ट + यात्री) के साथ 1.5 ms−1 की स्थिर चाल से ऊपर की तरफ जा रही है। गति का विरोध करने वाले घर्षण बल का मान 3000 N है। तो मोटर द्वारा लिफ्ट को प्रदान की गई न्यूनतम शक्ति का मान वॉट में है: (g = 10 ms^−2)
- 20000
- 23500
- 34500
- 23000
- एक पम्प का इंजन, नलिका पाइप में जल फेंकता है, जल पाइप में से गुजरता है तथा इसे 2 मीटर/सेकण्ड के वेग से छोड़ता है। पाइप के प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान 100 किग्रा/मी है। इंजन की क्षमता होगी?
- 100 वॉट
- 800 वॉट
- 200 वॉट
- 400 वॉट
- यदि एक सदिश
, सदिश के अभिलंबवत् है, तो का मान है:- 1/2
- −1/2
- 1
- −1
- एक भारोत्तोलक (weight lifter) 300 kg का भार 3 s में जमीन से 2 m की ऊँचाई तक उठा लेता है। उसके द्वारा वाट में उत्पन्न औसत शक्ति है—
- 5880
- 4410
- 1960
- 2200
- 5880
- एक कुली किसी संदूक को 2 m की ऊँचाई तक उठाने में 1 मिनट लेता है, लेकिन एक दूसरा कुली उसी संदूक को उतनी ही ऊँचाई तक उठाने में 30 s लेता है। दोनों कुलियों की शक्ति का अनुपात है:
- 2 : 1
- 1 : 2
- 1 : 3
- 3 : 1
- द्रव्यमान m का एक गतिशील गुटका
द्रव्यमान के किसी दूसरे स्थिर गुटके से संघट्ट करता है। संघट्ट के पश्चात् हल्का गुटका विराम अवस्था में आ जाता है। यदि हल्के गुटके का प्रारम्भिक वेग v है, तो प्रत्यानयन गुणांक (e) का मान होगा- 0.25
- 0.5
- 0.4
- 0.8
- यदि
N और m/s है, तो तात्क्षणिक शक्ति है:- 75 वॉट
- 45 वॉट
- 195 वॉट
- 100 वॉट
- दो बलों का सदिश योग उनके सदिश व्यवकलन के लंबवत् है। उस स्थिति (प्रकरण) में,
- बल एक दूसरे के बराबर होते हैं।
- बल परिमाण में परस्पर बराबर नहीं होते हैं।
- बल परिमाण में परस्पर बराबर होते हैं।
- कुछ कहा नहीं जा सकता।
- एक अणु में दो परमाणुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा U(x) =
द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ a और b धनात्मक नियतांक हैं तथा x परमाणुओं के बीच की दूरी है। परमाणु स्थिर साम्य में होता है, जब- x = 0
- x =
- x =
- x =
- 2 kg के एक ब्लॉक को एक 10 m ऊँचे आनत तल पर खिसकाने में 300 J कार्य करना पड़ता है। g को 10 m/s2 मानते हुए घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य होगा:
- 200 J
- शून्य
- 100 J
- 1000 J
- दो पिण्डों की गतिज ऊर्जाओं का अनुपात 4 : 1 है तथा इनके संवेग समान हैं तो इनके द्रव्यमानों का अनुपात होगा:
- 1 : 1
- 1 : 4
- 1 : 2
- 4 : 1
- एक बन्दूक से एक 10 ग्राम की गोली 1000 मी/से. प्रारम्भिक वेग से निकलती है तथा समान लेवल पर पृथ्वी पर 500 मी/से. से टकराती है। किया गया कार्य जूल में है:
- 5000
- 375
- 3750
- 500
- एक कण की स्थिति सदिश
है। कण का वेग है:- मूलबिन्दु की ओर निर्देशित
- स्थिति सदिश के समांतर
- स्थिति सदिश के लंबवत
- मूलबिन्दु से दूर निर्देशित
- 1 ग्राम तथा 9 ग्राम के दो द्रव्यमान एकसमान गतिज ऊर्जा रखते हैं। उनके रेखीय संवेगों का अनुपात होगा :
- 9 : 1
- 1 : 3
- 1 : 9
- 3 : 1
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