निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तर को रगंइए —
- निम्नलिखित में से किस पिंड का द्रव्यमान केंद्र उसके बाहर स्थित होता है।
- शॉटपुट (गोला)
- पासा
- पेंसिल
- चूड़ी
- किसी वस्तु का द्रव्यमान M है और दिए गए घूर्णन-अक्ष के परितः घूर्णन-त्रिज्या k है। घूर्णन-अक्ष के परितः वस्तु का जड़त्व-आघूर्ण होगा
Mk²- Mk²
- ΣMk²
- एक चक्का जिसका अपनी लम्ब अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण 2 kg m2 है, 60 चक्र प्रति मिनट की दर से इस अक्ष के परितः घूम रहा है। इस चक्के के घूर्णन को एक मिनट में रोकने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण का मान होगा:
N m N m N m N m
- द्रव्यमान नहीं खोकर, यदि पृथ्वी की त्रिज्या एकाएक घटकर आधी हो जाए तो दिन-रात होंगे
- 12 घंटे के
- 24 घंटे के
- 6 घंटे के
- 4 घंटे के
- एक M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या का ठोस एक समान गोला एक खुरदरे क्षैतिज समतल पर अंशतः फिसलन तथा अंशतः घूर्णन गति करता है। इस प्रकार की गति में गोले का
- द्रव्यमान केन्द्र के परितः केवल घूर्णन गतिज ऊर्जा संरक्षित होगी।
- द्रव्यमान केन्द्र के परितः कोणीय संवेग संरक्षित होगा।
- समतल के साथ गोले के स्पर्श बिन्दु के परितः उसका कोणीय संवेग संरक्षित होगा।
- कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित होगी।
- L लम्बाई और M द्रव्यमान की एक पतली छड़ को अपने मध्य बिन्दु पर 90° के कोण पर मोड़ा गया है। छड़ के मोड़ बिन्दु से एक अक्ष इस तरह जाती है कि, मुड़ी छड़ के दो भागों से बने तल से अक्ष लम्ब दिशा में है। इस अक्ष के गिर्द मुड़ी छड़ का जड़त्व आघूर्ण होगा:
- एक ठोस गोलीय गेंद मेज पर लुढ़कती है। इसकी घूर्णी गतिज ऊर्जा और कुल गतिज ऊर्जा का अनुपात है:
- एक मीटर त्रिज्या का एक पहिया प्रति मिनट 30 चक्कर लगाता है। पहिये की कोणीय चाल है
- 4π rad s⁻¹
rad s⁻¹- π rad s⁻¹
- 2π rad s⁻¹
- यदि किसी वस्तु के सभी कण मूलबिंदु से समान दूरी R पर स्थित हों, तो मूलबिंदु से वस्तु के द्रव्यमान-केंद्र की दूरी d के लिए
- d = R
- d ≥ R
- d ≤ R
- d > R
- एक पतली एकसमान डिस्क के, इसके केन्द्र से गुजरने वाले एवं इसके तल के लम्बवत् अक्ष के परितः घूर्णन की त्रिज्या का, इस डिस्क के इसके व्यास के परितः घूर्णन की त्रिज्या से अनुपात का मान होगा:
- 4 : 1
: 1- 2 : 1
- 1 :
- उपेक्षणीय द्रव्यमान की 1 m लम्बी किसी दृढ़ छड़ के दो सिरों से 5 kg और 10 kg द्रव्यमान के दो कण जुड़े हैं। 5 kg के कण से इस निकाय के संहति केन्द्र की दूरी (लगभग) है:
- 67 cm
- 50 cm
- 33 cm
- 80 cm
- 100 Nm का एक नियत बलाघूर्ण, 300 kg m2 के जड़त्व आघूर्ण के एक पहिये को उसके केंद्र से गुजरने वाली धुरी के परितः घुमाता है। विराम से प्रारम्भ करके, 3 s के बाद इसका कोणीय वेग है –
- 15 rad/s
- 1 rad/s
- 10 rad/s
- 5 rad/s
- एक फ्लाईव्हील अपने अक्ष के परितः 360 J की घूर्णन गतिज ऊर्जा से घूमता है। कोणीय वेग 30 रेडियन/से है। घूर्णन अक्ष के परितः फ्लाईव्हील का जड़त्व आघूर्ण होगा:
- 0.15 किग्रा-मी2
- 0.6 किग्रा-मी2
- 0.8 किग्रा-मी2
- 0.75 किग्रा-मी2
- कोणीय संवेग (angular momentum) का SI मात्रक है
- इनमें कोई नहीं
- kg m s⁻¹
- kg m² s⁻¹
- kg m s
- R त्रिज्या का एक ठोस गोला एक चिकनी क्षैतिज सतह पर रखा हुआ है। इस पर एक क्षैतिज बल ‘F’ निम्नतम बिन्दु से ‘h’ ऊँचाई तक लगाया जाता है। द्रव्यमान केन्द्र के अधिकतम त्वरण के लिए निम्न सत्य होगा:
- h = 0
- h व R के मध्य कोई संबंध नहीं होगा।
- h = R
- h = 2R
- किसी स्थिर बिन्दु के परितः किसी समतल में घूर्णन करते हुए एक पिण्ड के कोणीय संवेग की दिशा होती है:
- त्रिज्या के अनुदिश
- घूर्णन-समतल से 45° कोण पर
- कक्षा की स्पर्शज्या के अनुदिश
- घूर्णन-समतल की लम्बवत् रेखा के अनुदिश
- 3 kg द्रव्यमान का एक ठोस बेलन किसी क्षैतिज समतल पर 4 m s−1 वेग से लुढ़क रहा है। यह 200 Nm−1 के बल नियतांक के एक क्षैतिज स्प्रिंग (कमानी) से टकराता है तो, स्प्रिंग से उत्पन्न अधिकतम संपीडन होगा:
- 0.2 m
- 0.5 m
- 0.6 m
- 0.7 m
- जब कोई डिस्क एक समान कोणीय वेग से घूर्णन करती है, तो निम्नलिखित में कौन-सा कथन सत्य नहीं होता?
- घूर्णन अक्ष का दिक्-विन्यास समान रहता है।
- घूर्णन की दिशा समान रहती है।
- घूर्णन की चाल शून्येतर होती है तथा समान रहती है।
- कोणीय त्वरण शून्येतर होता है तथा समान रहता है।
- यदि किसी कण पर क्रियाकारी बल
का स्थिति सदिश हो और मूल बिन्दु के परितः इस बल का बल आघूर्ण हो, तो: तथा तथा तथा तथा
- किसी वृत्ताकार चकती का उसके व्यास के गिर्द जड़त्व-आघूर्ण क्या होगा, यदि उसके द्रव्यमान एवं त्रिज्या इकाई हो?
इकाई इकाई- 1 इकाई
इकाई
- m = 5 द्रव्यमान का एक कण
वेग से XOY तल में y = x + 4 रेखा पर चलता है। मूल बिन्दु के परितः कोणीय संवेग होगा- 7.5 इकाई
- 40
इकाई - 60 इकाई
- शून्य
- यदि एक वृत्ताकार प्लेट से एक संकेंद्रीय (concentric) डिस्क काटकर निकाल दिया जाए तो बचे भाग के द्रव्यमान-केंद्र का स्थान
- अपरिवर्तित रहेगा
- बदल जाएगा
- निकाले गए भाग के साइज पर निर्भर कर भी सकता है और नहीं भी कर सकता है
- निकाले गए भाग के साइज पर निर्भर करेगा
- एक वृत्ताकार चकती को लोहे तथा एल्युमिनियम से मिलाकर बनाया जाता है जिस कारण ज्यामिति अक्ष के सापेक्ष इसका जड़त्व आघूर्ण अधिकतम हो जाता है। यह सम्भव है जब:
- एल्युमिनियम आन्तरिक भाग पर तथा इसके चारों ओर लोहे का परिवेश हो।
- लोहे तथा एल्युमिनियम की परतों को एकान्तर रूप से लगाया जाये।
- लोहे की परत दोनों बाह्य सतह पर तथा एल्युमिनियम की परत आन्तरिक रूप से लगायी जाये।
- लोहा आन्तरिक भाग पर तथा इसके चारों ओर एल्युमिनियम का परिवेश हो।
- किसी नत समतल का आनत कोण ‘θ’ है। इस पर ‘m’ द्रव्यमान तथा ‘R’ त्रिज्या का एक ठोस गोला ऊपर से नीचे की ओर इस प्रकार गति करता है कि प्रथम दशा में गति पूर्णतः लोटनिक है तथा दूसरी दशा में गति केवल सरकी है, तो इन दोनों दशाओं में गोले के त्वरणों का अनुपात होगा:
- 2 : 5
- 5 : 7
- 7 : 5
- 2 : 3
- मूल बिन्दु के परितः स्थिति
m पर कार्यरत बल N का बल आघूर्ण क्या है? - किसी पतली एक समान छड़ का द्रव्यमान M और लम्बाई L है। उसके मध्य बिन्दु से होकर जाने वाली उसकी लम्बाई के लम्बवत् अक्ष के परितः छड़ का जड़त्व आघूर्ण I0 है, तो छड़ के एक सिरे से गुजरने वाली और उसकी लम्बाई के लम्बवत् अक्ष के परितः उसका जड़त्व आघूर्ण होगा:
- I0 + M L2/2
- I0 + M L2/4
- I0 + M L2
- I0 + 2 M L2
- यदि पृथ्वी के ध्रुवों की बर्फ पिघलकर भूमध्य क्षेत्र (equatorial region) में आ जाए, तो दिन-रात की अवधि (duration)
- बढ़ जाएगी
- घट जाएगी
- 24 घंटे ही रहेगी
- अनिश्चित हो जाएगी
- द्रव्यमान M, लंबाई l तथा चौड़ाई b के आयताकार पटल का, उसके केंद्र से गुजरते हुए तथा उसके तल के अभिलंब अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण होता है
+ b² (l² + b²) (l + b) + b
- एक ठोस गोला लोटन गति में है। लोटन गति में वस्तु की स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा Kt के साथ-साथ घूर्णी गतिज ऊर्जा (Kr) भी होती है। गोले के लिए Kt : Kt + Kr का अनुपात होगा:
- 5 : 7
- 7 : 10
- 10 : 7
- 2 : 5
- यदि
है, तो का मान है: - द्रव्यमान m तथा त्रिज्या R का एक ठोस गोला अपने व्यास के परितः घूर्णन कर रहा है। उसी द्रव्यमान तथा उसी त्रिज्या का एक ठोस बेलन (सिलेंडर) भी अपने ज्यामितीय अक्ष के परितः घूर्णन कर रहा है। बेलन के घूर्णन की कोणीय चाल गोले से दो गुना है। इन दोनों की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का अनुपात (Eगोला / E~बेलन) होगा:
- 3 : 1
- 1 : 5
- 1 : 4
- 2 : 3
- यदि घूमते हुए टेबुल पर एक मनुष्य अपना हाथ फैलाकर चक्रणी गति कर रहा हो तो जब वह अपने हाथ को झुकाएगा तो उसकी चक्रणी दर (spinning rate)
- में कोई परिवर्तन नहीं होगा
- बढ़ जाएगी
- घट जाएगी
- शून्य हो जाएगी
- R त्रिज्या और 9 M द्रव्यमान की एक डिस्क से R/3 त्रिज्या एवं M द्रव्यमान की एक छोटी डिस्क संकेन्द्री रूप से काट कर निकाल ली गई है। शेष बचे भाग का उसके तल के लम्बवत् और उसके केन्द्र से होकर जाने वाली अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा:
- M R2
- यदि सदिश
और के बीच कोण θ है, तो गुणन का मान है:- शून्य
- किसी कण जिसका स्थिति सदिश 2
m है, पर जब मूल बिन्दु के परितः 3 N का कोई बल कार्य करता है, तो बल आघूर्ण ज्ञात कीजिये।- 6
N m - −6
N m - 6
N m - 6
N m
- 6
- बिन्दु
पर कार्यरत एक बल का बल आघूर्ण ज्ञात कीजिए। का परिणामी बराबर है:- A
- इकाई सदिश
- शून्य
- शून्य सदिश
- एक समान कोणीय त्वरण से घूम रही किसी फिरकी (fly wheel) की कोणीय चाल 16 सेकेंड में 1200 rpm (घूर्णन प्रति मिनट) से 3120 rpm हो जाती है। कोणीय त्वरण का मान rad/sec2 में है:
- 12π
- 2π
- 104π
- 4π
- कोई ठोस गोला मुक्त आकाश में अपनी सममिति अक्ष के परितः मुक्त रूप से घूर्णन कर रहा है। इस गोले का द्रव्यमान समान रखते हुए इसकी त्रिज्या में वृद्धि की जाती है। गोले के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक राशि स्थिर रहेगी?
- कोणीय वेग
- जड़त्व आघूर्ण
- कोणीय संवेग
- घूर्णी गतिज ऊर्जा
- m तथा 2m द्रव्यमान के दो कणों के बीच की दूरी R है। यदि इन द्रव्यमानों के स्थान एक-दूसरे से बदल दिए जाएँ तब द्रव्यमान-केंद्र का
- स्थान अपरिवर्तित रहेगा
- विस्थापन
होगा - विस्थापन
होगा - विस्थापन
होगा
- एक वृत्तीय डिस्क और वृत्तीय रिंग, जिनका द्रव्यमान और त्रिज्या समान हैं, के अपने-अपने अक्ष के परितः परिभ्रमण त्रिज्याओं का अनुपात होगा:
: :- 1 :
: 1
- एक डिस्क ω कोणीय वेग से घूर्णन कर रही है। एक बच्चा इस पर बैठ जाता है, तो क्या संरक्षित रहेगा?
- गतिज ऊर्जा
- रेखीय संवेग
- स्थितिज ऊर्जा
- कोणीय संवेग
- एक कण x-अक्ष के समांतर नियत वेग से चल रहा है। मूलबिंदु के सापेक्ष इसका कोणीय संवेग
- शून्य है
- नियत रहता है
- बढ़ता ही जाता है
- घटता ही जाता है
- एक गेंद बिना फिसले लुढ़कती है। द्रव्यमान के केन्द्र से जाते हुए अक्ष के परितः गेंद की परिभ्रमण त्रिज्या K है। यदि गेंद का अर्द्धव्यास R है, तब संपूर्ण ऊर्जा का कौन सा भाग उसकी घूर्णन ऊर्जा से संबंद्ध होगा?
- जब किसी निकाय (system) में क्रियाशील बल-आघूर्ण (torque) शून्य हो, तो निम्नलिखित में कौन अचर होगा
- बल
- रेखीय आवेग
- कोणीय संवेग
- रैखिक संवेग
- 4 cm त्रिज्या 2 kg द्रव्यमान का कोई ठोस बेलन अपने अक्ष के परितः 3 rpm की दर से घूर्णन कर रहा है। 2π परिक्रमण करने के पश्चात् इसे रोकने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण है:
- 2 × 10−3 N m
- 2 × 10−6 N m
- 12 × 10−4 N m
- 2 × 106 N m
- यदि
और है, तो रैखिक वेग का मान है: - 75 kg द्रव्यमान को एक पुली से उठाने के लिए 250 N बल की आवश्यकता पड़ती है। यदि रस्सी 12 m खींचने पर भार 3 m ऊपर उठता है, तो पुली निकाय की दक्षता होगी:
- 33.3 %
- 90%
- 75 %
- 25 %
- R त्रिज्या और M द्रव्यमान वाली एक समान वृत्ताकार डिस्क का अपनी तल के लम्बवत् तथा किनारे से गुजरने वाली अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण है:
- M R2
M R2 M R2 M R2
- एक m द्रव्यमान तथा r त्रिज्या की रिंग केन्द्र से गुजरने वाले अक्ष के लम्बवत् घूमती है। इसका कोणीय वेग ω है। इसकी गतिज ऊर्जा होगी:
mr2ω2- mrω2
- mr2ω2
mrω2
- द्रव्यमान M तथा त्रिज्या R की किसी डिस्क से R व्यास का कोई वृत्ताकार छिद्र इस प्रकार काटा जाता है कि उसकी परिधि, डिस्क के केन्द्र से गुजरे। डिस्क के शेष भाग का, डिस्क के लम्बवत् उसके केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा:
- 13 M R2/32
- 15 M R2/32
- 9 M R2/32
- 11 M R2/32
- किसी छोटी वस्तु का घनत्व एकसमान है। यह किसी वक्र समतल पर प्रारम्भिक वेग ‘v’ से ऊपर की ओर लुढ़कती है। यह अपनी प्रारम्भिक स्थिति से अधिकतम
ऊँचाई तक पहुँचती है। यह वस्तु है एक:- डिस्क
- रिंग (छल्ला)
- ठोस गोला
- खोखला गोला
- किसी अक्ष के परितः किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण 1.2 किग्रा मी2 है। आरम्भ में पिण्ड स्थिर है। इसमें 1500 J की घूर्णन गतिज ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए 25 रेडियन/सेकण्ड2 का कोणीय त्वरण उस अक्ष के परितः कितने समय के लिए लगाना पड़ेगा?
- 8 सेकण्ड
- 4 सेकण्ड
- 10 सेकण्ड
- 2 सेकण्ड
- M द्रव्यमान का एक पिंड किसी अक्ष के परितः समरूप कोणीय वेग ω से परिभ्रमण कर रहा है। उस अक्ष के परितः पिंड का जड़त्व-आघूर्ण I है। उस पिंड का कोणीय संवेग होगा
MIω²- Iω
- MIω
Iω²
- एक चक्र का कोणीय त्वरण 3.0 rad/sec2 है और इसकी आरम्भिक कोणीय चाल 2.00 rad/sec है। 2 सेकण्ड के काल में इसके घुमावों का मान रेडियन में होगा:
- 10
- 12
- 6
- 4
- एक वृत्ताकार डिस्क और एक वृत्ताकार वलय समान त्रिज्याएं रखती हैं। वे अपने-अपने तल में ही स्थित एक स्पर्शरेखीय अक्ष के गिर्द घूमती हैं। डिस्क और वलय की क्रमशः परिभ्रमण त्रिज्याओं का अनुपात होगा:
- 2 :
:- 2 : 1
- 1 :
- 2 :
- यदि m₁ तथा m₂ द्रव्यमानों के दो कणों के बीच की दूरी d हो, तो इनके द्रव्यमान-केंद्र की दूरी m₂ के स्थान से होगी
d d
- त्रिज्या 50 cm और द्रव्यमान 2 kg का एक ठोस बेलन 30° नति कोण के एक आनत तल पर लुढ़कता है। बेलन के द्रव्यमान की चाल 4 m/s है। आनत सतह पर बेलन द्वारा तय की गई दूरी होगी:
- 1.2 m
- 1.6 m
- 2.4 m
- 2.2 m
- वृत्ताकार पथ में घूर्णन करते हुए किसी पहिए पर स्थित बिन्दु की तात्क्षणिक कोणीय स्थिति समीकरण,
= 2t3 − 6t2 से निरूपित की जाती है, तो पहिये पर लगने वाले बल-आघूर्ण का मान शून्य होगा:- t = 1 से. पर
- t = 0.5 से. पर
- t = 2 से. पर
- t = 0.25 से. पर
- एक ठोस गोला, डिस्क तथा सिलेण्डर एक ही पदार्थ के बने हैं। इनके द्रव्यमान समान हैं। ये तीनों घूर्णन गति करते हुए नत समतल पर नीचे आते हैं तो:
- ठोस गोला पहले नीचे पहुँचेगा।
- तीनों नीचे एक साथ पहुँचेंगे।
- ठोस गोला अंत में नीचे पहुँचेगा।
- डिस्क पहले में नीचे पहुँचेगा।
- R त्रिज्या वाले एकसमान अर्धवृत्तीय तार के द्रव्यमान-केंद्र की दूरी उसके ज्यामितीय केंद्र से होती है
- 1 मीटर व्यास का एक पहिया एक मिनट में 30 चक्कर लगाता है, तो परिधि पर के किसी बिंदु का रैखिक वेग है
- 2π m s⁻¹
- π m s⁻¹
- 4π m s⁻¹
m s⁻¹
- 10 kg द्रव्यमान के पहिये का उसके अपने अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण 160 kgm² है। घूर्णन-त्रिज्या का मान है
- 4 m
- 10 m
- 6 m
- 5 m
- किसी वृत्त की परिधि पर गतिमान एक पिण्ड का कोणीय त्वरण होगा:
- त्रिज्या के अनुदिश, केन्द्र से बाहर की ओर
- त्रिज्या के अनुदिश, केन्द्र की ओर
- घूर्णन अक्ष के अनुदिश
- इसकी स्थिति की स्पर्शज्या के अनुदिश
- एक खोखले सिलिन्डर का द्रव्यमान 3 kg तथा त्रिज्या 40 cm है। इस पर एक डोरी लपेट दी गई है। यदि इस डोरी को 30 N के बल द्वारा खींचा जाये तो, सिलिन्डर का कोणीय त्वरण कितना होगा?
- 25 rad/s2
- 25 m/s2
- 0.25 rad/s2
- 5 m/s2
- एक ठोस गोला h ऊर्ध्वाधर ऊँचाई के नत समतल पर बिना फिसले घूर्णन गति करता है। उसकी चाल होगी:
- एक पतली छड़ का इसके मध्य बिन्दु से गुजरने वाले छड़ के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण 2400 g cm2 है। 400 g की छड़ की लम्बाई लगभग है-
- 72.0 cm
- 17.5 cm
- 20.7 cm
- 8.5 cm
- जड़त्व-आघूर्ण का SI मात्रक है
- kg m²
- kg m⁻¹
- kg m⁻²
- kg m
- यदि अर्धवृत्तीय एकसमान तार के द्रव्यमान-केंद्र की दूरी इसके ज्यामितीय केंद्र से 1 cm हो तब अर्धवृत्त की त्रिज्या का मान होगा लगभग
- 1.57 cm
- 90 cm
- 2 cm
- 1.80 cm
- कणों के एक निकाय का द्रव्यमान केन्द्र निर्भर नहीं करता-
- कणों के बीच की दूरी पर
- कणों की स्थिति पर
- कणों पर लगने वाले बल पर
- कणों के द्रव्यमान पर
- एक ठोस बेलन, जिसका द्रव्यमान M है और अर्द्धव्यास R है, एक नत तल पर बिना फिसले लुढ़कता है। तल की लम्बाई L व ऊँचाई h है। नीचे पहुँचने पर, बेलन के द्रव्यमान केन्द्र की चाल होगी:
- कोई डिस्क और कोई गोला, जिनकी त्रिज्याएं समान परन्तु द्रव्यमान भिन्न हैं, समान ऊँचाई और समान लम्बाई के दो आनत समतलों पर लुढ़कते हैं। इन दोनों पिण्डों में से तली तक पहले कौन पहुँचेगा?
- दोनों एक ही समय पहुँचेंगे
- इनके द्रव्यमानों पर निर्भर करता है
- गोला
- डिस्क
- किसी एकांक व्यास तथा एकांक द्रव्यमान वाली वृत्ताकार प्लेट का जड़त्व-आघूर्ण किसी व्यास के परितः
मात्रक होगा मात्रक होगा मात्रक होगा मात्रक होगा
- यदि दो पिण्डों के अपने अक्षों के परितः घूर्णनों के जड़त्व आघूर्ण क्रमशः I और 2I हों और उनकी घूर्णन गतिज ऊर्जाएँ समान हों, तो उनके कोणीय संवेगों का अनुपात होगा:
- 2 : 1
- 1 :
- 1 : 2
: 1
- द्रव्यमान 100 kg और त्रिज्या 2 m की कोई चकती किसी क्षैतिज फर्श पर लुढ़कती है। इसके संहति केन्द्र की चाल 20 cm/s है। इसे रोकने के लिए कितने कार्य की आवश्यकता होगी?
- 1 J
- 2 J
- 30 kJ
- 3 J
- 1 m त्रिज्या का एक पहिया बिना फिसले लुढ़क रहा है। जब पहिया आधा चक्कर पूर्ण कर लेता है, तो धरातल पर सम्पर्क बिन्दु P के विस्थापन का मान है: (जहाँ P धरातल तथा पहिये का सम्पर्क बिन्दु है)
- 2 m
- π m
m m
- एक डिस्क का व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण I है। इसके समतल के लम्बवत् तथा इसके रिम पर एक बिन्दु से गुजरते अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा:
- 4I
- 6I
- 3I
- 5I
- द्रव्यमान M एवं त्रिज्या R के एक ठोस गोले के व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण है
- MR²
MR² MR² MR²
- एक द्वियुग्म:
- कोई गति उत्पन्न नहीं करता
- घूर्णन तथा रेखीय दोनों गति उत्पन्न करता है
- पूर्ण रेखीय गति उत्पन्न करता है
- पूर्ण घूर्णन गति उत्पन्न करता है
- चार पतली एक जैसी छड़ों से जिनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान M तथा लम्बाई l है, एक वर्गाकार फ्रेम बना है। इस वर्ग के केंद्र से गुजरने वाले तथा इसके तल के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष फ्रेम का जड़त्व आघूर्ण होगा:
M l2 M l2 M l2 M l
- एक कण एक सरल रेखा पर समरूप वेग से गतिशील है। उस सरल रेखा पर एक बिंदु के परितः कण का कोणीय संवेग है
- शून्य
- परिवर्तनशील
- नियत, परंतु शून्य से भिन्न
और दो सदिश हैं तथा θ उनके बीच का कोण है। यदि , तो θ का मान है:- 90°
- 30°
- 60°
- 45°
- घूर्णन त्रिज्या का SI मात्रक है
- kg-m
- m
- m²
- m⁻²
- यदि किसी घूमती हुई वस्तु का जड़त्व-आघूर्ण उसके द्रव्यमान के पुनर्वितरण के कारण बढ़ जाता है तो इसका कोणीय वेग
- बढ़ जाता है
- घट जाता है
- अपरिवर्तित रहता है
- शून्य हो जाता है
- एक 3 m लम्बी छड़ जिसकी इकाई लम्बाई का द्रव्यमान इसकी एक सिरे से दूरी
के समानुपाती है, तो इसी सिरे से इसके गुरुत्व केन्द्र की अवस्था होगी:- 1.5 m
- 2 m
- 3.0 m
- 2.5 m
- किसी बिन्दु,
, पर एक बल, लग रहा है, तो ‘α’ के किस मान के लिये मूल बिन्दु के परितः कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा?- शून्य
- −1
- 1
- 2
- एक ठोस गोले तथा एक पतले गोलीय खोल के द्रव्यमान तथा उनके व्यास के गिर्द जड़त्व-आघूर्ण बराबर हैं। उनकी त्रिज्याओं के बीच अनुपात है
- 3 : 5
: :- 5 : 3
- एक M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या वाली डिस्क का व्यास के समान्तर तथा परिधि के स्पर्शी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण होगा:
M R2 M R2 M R2 M R2
- प्रत्येक त्रिज्या r की तीन सर्वसम धात्विक गेंदें एक क्षैतिज सतह पर एक दूसरे को स्पर्श करती हुई इस प्रकार रखी जाती हैं कि जब तीनों गेंदों के केन्द्रों को मिलाते हैं तो एक समबाहु त्रिभुज बनता है। निकाय का द्रव्यमान केन्द्र अवस्थित है:
- किसी एक गेंद के केन्द्र पर
- माध्यिकाओं के प्रतिच्छेदन बिन्दु पर
- किन्हीं दो गेंदों के केन्द्रों को मिलाने रेखा पर
- क्षैतिज सतह पर
- R त्रिज्या और M द्रव्यमान का एक ड्रम बिना फिसले θ कोण के औभनत तल पर घूमकर लुढ़क रहा है। घर्षण बल:
- घूर्णीय व स्थानांतरीय गति को कम कर रहा है।
- ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में बदल रहा है।
- घूर्णीय गति को कम कर रहा है।
- स्थानांतरीय ऊर्जा को घूर्णीय ऊर्जा में बदल रहा है।
- एक हल्की छड़ की लम्बाई l है। इसके दो सिरों में क्रमशः m1 तथा m2 द्रव्यमान के पिण्ड संलग्न हैं। इस छड़ के लम्बवत् तथा इसके संहति केन्द्र से गुजरते हुए अक्ष के परितः इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण होगा:
l2 l2 l2- (m1 + m2) l2
- बिन्दु (2, 0, −3) पर कार्यरत बल
का बिन्दु (2, −2, −2) के परितः आघूर्ण होगा: - द्रव्यमान M तथा लंबाई l की एक पतली छड़ का, इसके एक सिरे से लंबाई के लंबवत गुजरते हुए अक्ष के परितः, जड़त्व-आघूर्ण होता है
- समान द्रव्यमान के दो कणों में से एक स्थिर है तथा दूसरे का त्वरण a⃗ है। इस निकाय के द्रव्यमान-केंद्र का त्वरण होगा
- 2
- शून्य
- M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या के एक ठोस गोले को इसकी अक्ष के परितः घूर्णन त्रिज्या तथा समान द्रव्यमान व त्रिज्या के पतले खोखले गोले की इसकी अक्ष के परितः घूर्णन त्रिज्या का अनुपात है:
- 3 : 5
- 5 : 3
- 2 : 5
- 5 : 2
- एक छड़ का भार W है। यह दो समान्तर क्षुरधारों (नाइफ एजों) A तथा B पर टिकी है और क्षैतिज अवस्था में सन्तुलन में है। यदि A तथा B के बीच की दूरी ‘d’ है तथा छड़ का द्रव्यमान केन्द्र A से
दूरी पर है तो, A पर अभिलम्ब प्रतिक्रिया का मान होगा: - R त्रिज्यावाली एक वृत्ताकार चकती (disc) की, इसके केंद्र से तथा इसके तल के लंबवत अक्ष के परितः घूर्णन-त्रिज्या है
- R
- M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या के एक वृत्तीय छल्ले से 90° सेक्टर के संगत एक चाप (आर्क) हटा दिया जाता है। बचे हुए छल्ले के भाग का जड़त्व आघूर्ण छल्ले के केन्द्र से गुजरने वाली तथा छल्ले के तल के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष M R2 का K गुना है। K का मान है :
- विभिन्न द्रव्यमानों के तीन पिण्ड
-अक्ष पर इस प्रकार रखे हैं: 300 g का पिण्ड मूल बिन्दु पर, 500 g का x = 40 cm पर तथा 400 g का x = 70 cm पर तो, मूल बिन्दु से द्रव्यमान केन्द्र की दूरी होगी:- 45 cm
- 50 cm
- 30 cm
- 40 cm
- नगण्य भार एवं 10 m लम्बाई वाली किसी दृढ़ छड़ के दोनों सिरों पर क्रमशः 10 kg एवं 20 kg द्रव्यमान वाले दो पिण्ड लगे हैं। तो 10 kg द्रव्यमान वाले पिण्ड से, निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की दूरी है:
m m- 5 m
- 10 m
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