निम्नलिखित में से प्रत्येक में सही उत्तर को रगंइए
- एक मोटरगाड़ी का द्रव्यमान 1200 kg है। यदि मोटरगाड़ी को 1.5 m/s2 के ऋणात्मक त्वरण (negative acceleration), अर्थात मंदन (retardation) के साथ विरामावस्था में लाना हो, तो मोटरगाड़ी और सड़क के बीच लगनेवाला घर्षण बल होगा
- −1500 N
- −1200 N
- −1800 N
- −2000 N
- संवेग (momentum) का SI मात्रक क्या है?
- kg m/s
- kg m
- m
- kg
- 10 ग्राम द्रव्यमान की एक गोली 400 मीटर/सेकंड के वेग से क्षैतिज दिशा में चलते हुए 2 किलोग्राम द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराती है, जो 5 मीटर लंबी हल्की, न खिंचने वाली डोरी से लटका हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, गुटके का गुरुत्व केंद्र 10 सेंटीमीटर की ऊर्ध्वाधर दूरी तक ऊपर उठ जाता है। गुटके से क्षैतिज रूप से बाहर निकलने के बाद गोली की गति होगी
- 100 m/s
- 160 m/s
- 80 m/s
- 120 m/s
- दो पिंडों पर एकसमान बल (Uniform force) आरोपित करने पर यह पाया गया कि एक वस्तु A में उत्पन्न त्वरण दूसरे वस्तु B में उत्पन्न त्वरण से चार गुना है। ऐसी स्थिति में पहली और दूसरी वस्तु के द्रव्यमान का अनुपात होगा
- 1
- 5 kg द्रव्यमान के किसी पिंड पर कोई बल
= (−3 + 4 ) N कार्य कर रहा है। यदि t = 0 पर पिंड का प्राराभिक वेग = (6 − 12 ) m s−1 हो, तो वह समय जब इसका वेग केवल y-अक्ष के अनुदिश होगा है –- 15 s
- 10 s
- कभी नहीं
- 2 s
- बंदूक का प्रतिक्षेप (recoil of the gun) किसके संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है?
- वेग के
- बलों के
- संवेग के
- ऊर्जा के
- रॉकेट प्रक्षेपण जिस सिद्धांत पर आधारित है, वह है
- नाभिकीय संलयन
- नाभिकीय विखंडन
- न्यूटन का गति नियम
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय
- गति करने के लिए स्वतंत्र किसी वस्तु पर कोई बल लगाया गया। यदि बल का परिमाण तथा वस्तु का द्रव्यमान ज्ञात हो, तो न्यूटन के दूसरे नियम की सहायता से हम
- वस्तु की स्थिति ज्ञात कर सकते हैं
- वस्तु का त्वरण ज्ञात कर सकते हैं
- वस्तु का भार ज्ञात कर सकते हैं
- वस्तु की चाल ज्ञात कर सकते हैं
- एक क्षैतिज टेबुल पर रखे 2 kg के पिंड को मात्र खिसकाने के लिए 10 N का क्षैतिज बल आवश्यक है। यदि इस पिंड पर 20 N का बल क्षैतिजतः आरोपित हो, तो इसका त्वरण होगा
- 5 m s−2
- 3 m s−2
- 4 m s−2
- इनमें कोई नहीं
- घर्षण गुणांक
- एक विमाहीन राशि है
- दो संस्पर्श-सतहों (contact ऽufaces) के बीच लगनेवाला घर्षण बल है
- की विमा MLT−2 है
- इनमें कोई नहीं
- कोई गेंद एक समान स्थानांतरीय गति कर रही है। इसका अर्थ है कि –
- गेंद का केंद्र अचर वेग से गति करता हे तथा गेंद अपने केंद्र के परितः एक समान घूर्णन करती हे।
- गेंद के सभी भागों का वेग (परिमाण एवं दिशा) समान है तथा यह वेग नियत है।
- यह विराम अवस्था में है।
- इसका पथ सरल रेखीय अथवा वृत्ताकार हो सकता है और गेंद एक समान चाल से चल रही है।
- घर्षण बल हमेशा कार्य करता है
- गति की लंबवत दिशा में
- गति की विपरीत दिशा में
- गति की दिशा में
- इनमें कोई सही नहीं है
- 36 N का बल 6 kg द्रव्यमान पर कि तनी देर तक लगे कि उसका वेग 12 m s−1 हो जाए?
- 12 s
- 2 s
- 3 s
- 6 s
- किसी पिंड का जडत्व
- घर्षण के कारण अवमंदित करता है
- उसकी चाल बढ़ाता है
- उसकी चाल कम करता है
- उसकी गति की अवस्था में परिवर्तन को प्रतिरोधित करता है
- न्यूटन (N) SI मात्रक है
- वेग का
- बल का
- कार्य का
- संवेग का
- किसी परमाणु में प्रोटॉन एवं इलेक्ट्रॉम के बीच लगनेवाले बल की प्रकृति होती है
- केवल गुरुत्वीय
- गुरुत्वीय एवं विद्युत-चुंबकीय दोनों
- केवल विद्युत-चुंबकीय
- केवल नाभिकीय
- एक आनत तल का झुकाव कोण 30° होने पर उसपर स्थित एक पिंड नीचे की ओर ठीक फिसलने की स्थिति में होता है। A के स्थान पर एक दूसरा पिंड B रखने पर पाया जाता है कि तल का झुकाव का कोण 40° होने पर पिंड तल पर नीचे की ओर ठीक फि सलने की स्थिति में आता है। तब
- निश्चित रूप से A की मात्रा > B की मात्रा
- निश्चित रूप से A की मात्रा > B की मात्रा
- A तथा B के लिए घर्षण गुणांक भिन्न है
- निश्चित रूप से A की मात्रा = B की मात्रा
- “प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रति क्रिया होती है” – यह है
- न्यूटन के गति का द्वितीय नियम
- न्यूटन के गति का प्रथम नियम
- गैलीलि यो का नियम
- न्यूटन के गति का तृतीय नियम
- कणों के बीच संघूट में संवेग संरक्षण का अवबोधन कि स आधार पर कि या जा सकता है?
- केवल न्यूटन का द्वितीय नियम
- केवल न्यूटन का प्रथम नियम
- ऊर्जा संरक्षण
- न्यूटन के द्वितीय एवं तृतीय नियम
- गति के तीसरे नियम के अनुसार क्रिया एवं प्रतिक्रिया
- सदैव एक ही वस्तु पर लगती हैं
- किसी भी एक वस्तु पर एक दूसरे के अभिलंबवत् कार्य करती हैं
- के परिमाण एवं दिशाएँ समान होती हैं
- सदैव दो भिन्न वस्तुओं पर विपरीत दिशाओं में कार्य करती हैं
- गुरुत्व के अधीन निर्बाध रूप से गिरते हुए पिंड से बँधी डोरी में तनाव
- पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है
- शून्य होता है
- गुरुत्वीय त्वरण के मान पर नि र्भर करता है
- पिंड के वेग पर निर्भर करता है
- यदि घर्षण गुणांक μ हो, तो नत समतल (inclined plane) पर रखी एक वस्तु नीचे की ओर तब सरकने लगेगी जब नत समतल के झुकाव का कोण निम्नलिखित से थोड़ा अधिक हो
- tan−1 μ
- tan μ
- tan−1
- tan
ऊंचाई तक जल से भरा कोई टैंकर एकसमान चाल से गतिमान है। अचानक ब्रेक लगाने पर टैंक में भरा जल- आगे कौ ओर गति करेगा
- पीछे की ओर गति करेगा
- प्रभावित नहीं होगा
- ऊपर की ओर उठेगा
- न्यूट्रॉन एवं प्रोटॉन के बीच लगनेवाले अन्योन्य क्रिया (interaction) की प्रकृति होती है
- गुरुत्वीय एवं नाभिकीय
- नाभिकीय एवं विद्युत-चुंबकीय
- केवल विद्युत-चुंबकीय
- केवल गुरुत्वीय
- रॉकेट किस नियम पर कार्य करता है
- द्रव्यमान संरक्षण नियम पर
- संवेग संरक्षण नियम पर
- ऊर्जा संरक्षण नियम पर
- वेग संरक्षण नियम पर
- 0.5 kg द्रव्यमान की एक पुस्तक टेबुल पर रखी है। पुस्तक का संवेग कि तना होगा?
- 0 (शून्य)
- 5 kg m/s
- 1.5 kg m/s
- 0.5 kg m/s
- 0.1 किग्रा द्रव्यमान के एक गुटके को एक दीवार से 5 न्यूटन के क्षैतिज बल द्वारा सटाकर रखा गया है। यदि गुटके एवं दीवार के बीच घर्षण गुणांक 0.5 है, तब गुटके पर कार्य करने वाले घर्षण-बल का मान होगा
- 2.5 न्यूटन
- 0.98 न्यूटन
- 4.5 न्यूटन
- 0.49 न्यूटन
- संवेग में परिवर्तन की दर (rate of change of momentum), निम्नलिखित में किस राशि को सूचित करती है?
- बल को
- त्वरण को
- इनमें किसी को नहीं
- द्रव्यमान को
- एक रुक्ष (rough) नत तल पर नीचे की ओर खिसकने वाले पिंड का त्वरण है
- g (sin θ − μ cos θ)
- g (sin θ + μ cos θ)
- μ cos θ
- g sin θ
- किसी परमाणु के नाभिक के अंदर दो प्रोटॉनों के बीच लगनेवाला बल होता है
- केवल गुरुत्वीय
- गुरुत्वीय, विद्युत-चुंबकीय एवं नाभिकीय तीनों
- केवल नाभिकीय
- केवल विद्युत-चुंबकीय
- दूध को मथने से क्रीम के अलग हो जाने का कारण है
- घर्षण बल
- श्यान बल
- गुरुत्व बल
- अपकेन्द्री बल
- यदि द्रव्यमान की कोई वस्तु पृथ्वी की सतह पर रखी हो, तो उसका भार होगा
- m से कम
- mg
- m
- इनमें कोई नहीं
- 0.15 kg द्रव्यमान की एक गेंद को 10 m की ऊँचाई से गिराया जाता है, जो ज़मीन से टकराकर उसी ऊँचाई तक वापस आती है। गेंद को दिए गए आवेग (impulse) का परिमाण लगभग है (g = 10 m/s2)
- 1.4 kg-m/s
- 2.1 kg-m/s
- 4.2 kg-m/s
- 0
- 150 g द्रव्यमान को किसी क्रिकेट की गेंद का प्राराभिक वेग
= (3 + 4 ) ms−1 और हिट होने के बाद अंतिम वेग = − (3 + 4 ) ms−1 है। गेंद का संवेग परिवर्तन kg m s−1 है –- −(0.9
+ 1.2 ) - शून्य
- −5(
+ ) - −(0.45
+ 0.6 )
- −(0.9
- किसी गति शील पिंड का वेग आधा करने से उसका संवेग हो जाता है
- आधा
- चौगुना
- चौथाई
- दुगुना
- किसी वस्तु का जड़त्व निर्भर करता है
- वस्तु के गुरुत्व केन्द्र पर
- वस्तु के द्रव्यमान पर
- गुरुत्वीय त्वरण पर
- वस्तु के आकार पर
- फुटबाल के खेल में कोई गोलरक्षक गोल पर तीव्र गति से आती बॉल को पकडने के पश्चात् अपने हाथों को पीछे की ओर खींचता है। ऐसा करके गोल रक्षक
- संवेग-परिवर्तन की दर में वृद्धि कर पाता है
- संवेग परिवर्तन की दर में कमी कर पाता है
- बॉल पर अधिक बल लगा पाता है
- बॉल द्वारा हाथों पर लगाए गए बल को कम कर पाता है
- एक ठोस गोला, एक रुक्ष आनत तल पर लोटन करता हुआ नीचे की ओर आता है। गोले पर घर्षण बल की दिशा होगी
- निर्धारित नहीं किया जा सकता
- ऊपर की ओर
- नीचे की ओर
- घर्षण शून्य होगा
- न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार क्रिया तथा प्रतिक्रिया से संबद्ध बल
- भिन्न-भिन्न वस्तुओं पर लगे हो सकते हैं
- हमेशा भिन्न-भिन्न वस्तुओं पर ही लगे होने चाहिए
- का परिमाण बराबर होना जरूरी नहीं है, किंतु उनकी दिशा समान होनी चाहिए
- हमेशा एक ही वस्तु पर लगे होने चाहिए
- 5 kg द्रव्यमान के एक पिंड पर कितना बल लगाने से उसमें 2 m/s2 का त्वरण उत्पन्न होगा?
- 5 N
- 10 N
- 2 N
- 7 N
- बल को होता है
- परिमाण और दिशा दोनों
- केवल परिमाण
- केवल दिशा
- न तो परिमाप और न ही दिशा
- जब किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगता है तब वह बल की दिशा में त्वरित हो जाती है। इस प्रकार उत्पन्न त्वरण वस्तु
- के जड़त्व के समानुपाती होता है
- पर लगे बल के समानुपाती होता है
- के द्रव्यमान के समानुपाती होता है
- के वेग के समानुपाती होता है
- घर्षण बल लगता है आपेक्षिक गति की
- दिशा के विपरीत
- दिशा के लंबवत
- दिशा में
- दिशा के साथ किसी भी कोण पर
- θ झुकाव वाले एक नत समतल (inclined plane) का ऊपरी आधा भाग पूरी तरह से चिकना है, जबकि निचला आधा भाग खुरदुरा है। यदि समतल के शीर्ष से विरामावस्था से चलना शुरू करने वाला एक ब्लॉक, तल पर पहुँचकर फिर से रुक जाता है, तो ब्लॉक और समतल के निचले आधे भाग के बीच घर्षण गुणांक (coefficient of friction) होगा
- μ = 2 tan θ
- μ = tan θ
- μ =
- μ =
- कोई बल 10 g द्रव्यमान की वस्तु A में 8 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है और कोई टूसरा बल 20 g द्रव्यमान की वस्तु
- A की अपेक्षा B पर बड़ा बल लगा है
- A और B दोनों पर समान बल लगा है
- A और B दोनों पर लगा बल शून्य है
- B की अपेक्षा A पर बड़ा बल लगा है
- संलग्न चित्र प्रदर्शित करता है
- प्रथम श्रेणी का उत्तोलक
- द्वितीय श्रेणी का उत्तोलक
- तृत्तीय श्रेणी का उत्तोलक
- कोई उत्तोलक नहीं
- निम्नलिखित में कौन सही है?
- 1 N = 1 kg
- 1 N = 1 kg/s2
- 1 N = 1 kg m
- 1 N = 1 kg m/s2
- कोई मीटर स्केल एक समान वेग से गति मान है। इसका अर्थ है कि –
- इस पर लगने वाला कुल बल शून्य होना आवश्यक नहीं है परंतु इस पर कार्य करने वाला बल-आघूर्ण शून्य है।
- स्केल पर लगने वाले बल का परिमाण शून्य है और स्केल के द्रव्यमान केंद्र के परितः कार्य करने वाला बल आघूर्ण भी शून्य है।
- स्केल पर कार्य करने वाले न तो बल और न ही बल आघूर्ण का शून्य होना आवश्यक है।
- स्केल पर लगने वाले बल का परिमाण शून्य है। परंतु स्केल पर द्रव्यमान केंद्र के परितः कोई बल-आघूर्ण कार्य कर सकता है।
- किसी कण को अनेक बलों के अधीन संतुलन में रहने के लिए आवश्यक शर्त है
- परिणामी बल के तीनों घटक शून्य हों
- परिमाणी बल के x, y तथा z घटक में से कोई घटक शून्य हों
- बलों का सदिश योगफल समय के साथ बदलता हो
- बलों का सदिश योगफल शून्य नहीं हो
- जब किसी वस्तु की गति त्वरित होती है तो
- उसपर हमेशा कोई बल कार्य करता है
- वह हमेशा पृथ्वी की ओर गिरती है
- उसके वेग में हमेशा वृद्धि होती है
- उसकी चाल में हमेशा वृद्धि होती है
- शक्ति (strength) की दृष्टि से न्यूनतम प्रबलता की अन्योन्य क्रिया है
- विद्युत-चुंबकीय
- गुरुत्वीय
- नाभिकीय
- मंद अन्योन्य क्रिया
- 2 kg द्रव्यमान का कोई पिंड किसी घर्षणहीन क्षैतिज मेज पर 4 ms−1 के नियत वेग से फिसल रहा है। इस वस्तु की इसी वेग से गति बनाए रखने के लिए आवश्यक बल है
- 2 N
- 0 N
- 32 N
- 8 N
- 500 क्रिग्रा की एक क्रेन 36 किमी/घण्टा के वेग से 50 मी त्रिज्या से मुड़ती है। अभिकेन्द्रीय बल होगा
- 1500 N
- 750 N
- 500 N
- 1000 N
- μs/μk का मान होता है
- शून्य
- 1 के बराबर
- 1 से अधिक
- 1 से कम
- एक कार R त्रिज्या वाले घुमावदार मोड़ पर चल रही है। सड़क θ कोण पर झुकी हुई है। कार के टायरों और सड़क के बीच घर्षण गुणांक μs है। इस सड़क पर अधिकतम सुरक्षित वेग क्या है?
- किसी रुक्ष क्षैतिज तल पर रखे 10 kg द्रव्यमान का एक आयताकार ब्लॉक 15 N के बल से क्षैतिज दिशा में खींचा जाता है। यदि संपर्क सतहों के बीच घर्षण गुणांक μ = 0.2 तथा g = 10 m s−2 हो, तो ब्लॉक
- 15 N के घर्षण बल का अनुभव करेगा
- 1.5 m s−2 के त्वरण से आरोपित बल की दिशा में गतिशील होगा
- 20 N के घर्षण बल का अनुभव करेगा
- 0.5 m s−2 के त्वरण से आरोपित बल की दिशा के विपरीत गति शील होगा
- कब्जेदार दरवाजा किसका उदाहरण है?
- द्वितीय क्रम लीवर
- तृतीय क्रम लीवर
- कैटीलीवर
- प्रश्म क्रम लीवर
- निम्नलिखित में किन दो राशियों का SI मात्रक kg m/s होता है?
- आवेग और वेग
- बल और संवेग
- संवेग और आवेग
- संवेग और विस्थापन
- 2400 kg द्रव्यमान की एक कार 10 m/s की चाल से चल रही है। कार की चाल 30 s में घटकर 7.5 m/s हो जाती है। कार पर लगनेवाला औसत मंदन बल होगा
- 200 N
- 2400 N
- 2000 N
- 10 N
- 50 सेमी त्रिज्या वाली एक समान वृत्ताकार डिस्क, जो विराम अवस्था में है, एक ऐसे अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र है जो उसके तल के लंबवत है और उसके केंद्र से होकर गुजरती है। इस पर एक टॉर्क लगाया जाता है जो 2.0 rad s−2 का निरंतर कोणीय त्वरण उत्पन्न करता है। 2.0 s के अंत में ms−2 में इसका कुल त्वरण लगभग है।
- 8.0
- 6.0
- 3.0
- 7.0
- यदि 2 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु A में 5 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करने के लिए F1 बल की आवश्यकता होती है और 4 kg द्रव्यमान की दूसरी वस्तु B में 2 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करने के लिए F2 बल की आवश्यकता होती है, तो निम्नलिखित में कौन सही है?
- F1 < F2
- F1 = F2
- F1 > F2
- इनमें कोई सही नहीं है
- दो कण A और B, क्रमशः rA और rB त्रिज्या वाले संकेंद्रित वृत्तों में एकसमान वृत्तीय गति से vA और vB चाल से चल रहे हैं। उनके घूर्णन का आवर्तकाल समान है। A की कोणीय चाल और B की कोणीय चाल का अनुपात होगा
- rA : rB
- rB : rA
- VA : VB
- 1 : 1
- किसी वस्तु का संवेग (momentum)
- न तो द्रव्यमान पर और न ही वेग पर निर्भर करता है
- केवल उसके वेग पर निर्भर करता है
- केवल उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है
- द्रव्यमान और वेग दोनों पर निर्भर करता है
- यदि गति करने के लिए स्वतन्त्र 1 किग्रा द्रव्यमान की किसी वस्तु पर 1 न्यूटन बल लगाया जाए, तो वह गति करेगी
- 1 मी से−2 से त्वरण से
- 1 मी से−1 की चाल से
- 1 किमी से−1 की चाल से
- एकसमान वेग
- m द्रव्यमान की एक वस्तु को एक खुरदरी क्षैतिज सतह (घर्षण गुणांक = μ) पर रखा गया है। वस्तु पर क्षैतिज बल लगाया जाता है, लेकिन वह हिलती नहीं है। अभिलंब प्रतिक्रिया और वस्तु पर लगने वाले घर्षण बल का परिणामी F दिया गया है, जहाँ F है
- |F| = μ mg
- |F| = mg + μ mg
- |F| ≤ mg
- |F| = mg
- एक विस्फोट एक चट्टान को क्षैतिज तल में तीन भागों में तोड़ देता है। उनमें से दो एक-दूसरे के समकोण पर जाते हैं। 1 किलोग्राम द्रव्यमान का पहला भाग 12 ms−1 की गति से चलता है और 2 किलोग्राम द्रव्यमान का दूसरा भाग 8 ms−1 की गति से चलता है। यदि तीसरा भाग 4 ms−1 की गति से उड़ता है, तो उसका द्रव्यमान है
- 7 kg
- 3 kg
- 5 kg
- 17 kg
- l लंबाई की डोरी का एक सिरा m द्रव्यमान के एक कण से जुड़ा है और दूसरा सिरा एक चिकनी क्षैतिज मेज पर लगी एक छोटी खूंटी से जुड़ा है। यदि कण v चाल से वृत्त में घूमता है, तो कण पर नेट बल (केंद्र की ओर निर्देशित) होगा (T डोरी में तनाव को दर्शाता है)
- शून्य
- T +
- T −
- T
- 100 kg द्रव्यमान की एक वस्तु को खींचने के लिए 4 kg-wt बल की आवश्यकता होती है। वस्तु और सतह के बीच घर्षण गुणांक है
- 0.04 N
- 0.01
- 0.04
- 0.1
- एक ट्रक रुका हुआ है और उसमें एक बॉब है जो ट्रक से जुड़े एक फ्रेम में एक हल्की डोरी से लटका हुआ है। ट्रक अचानक a के एक्सेलरेशन के साथ दाईं ओर चलता है। पेंडुलम झुकेगा
- बाईं ओर और पेंडुलम का वर्टिकल के साथ झुकाव का एंगल sin−1
है - बाईं ओर और पेंडुलम का वर्टिकल के साथ झुकाव का एंगल tan−1
है - बाईं ओर और पेंडुलम का वर्टिकल के साथ झुकाव का एंगल tan−1
है - बाईं ओर और पेंडुलम का वर्टिकल के साथ झुकाव का एंगल sin−1
है
- बाईं ओर और पेंडुलम का वर्टिकल के साथ झुकाव का एंगल sin−1
- यदि सभी पदार्थ केवल न्यूट्रॉन जैसे विद्युतीय रूप से उदासीन (electrically neutral) कणों से मिलकर बने होते, तब
- स्प्रिंग बल का अस्तित्व नहीं होता
- घर्षण का अस्तित्व नहीं होता
- डोरी में तनाव नहीं होता
- इनमें सभी कथन सही हैं
- साइकिल, मोटरसाइकिल, कार और रेलगाड़ी में किसका जड़त्व अधिक है?
- मोटरसाइकिल का जड़त्व अधिक है
- साइकिल का जड़त्व अधिक है
- सभी के जड़त्व बराबर हैं
- रेलगाड़ी का जड़त्व अधिक है
- विराम अवस्था से गति आरंभ करने वाली m द्रव्यमान को किसी कार का 2 s में पूर्व दिशा में वेग
= v ( v > 0) हो जाता है। यह मानते हुए कि कार एक समान त्वरण से गति करती है, कार पर लगने वाला बल का परिमाण – पूर्व दिशा के अनुदिश है और सड़क तथा टायरों के बीच घर्षण के कारण है। है जो इंजन के कारण लगता है। पूर्व दिशा के अनुदिश है और कार के इंजन द्वारा लगाया जाता है। से अधिक पूर्व के अनुदिश है तथा यह इंजन द्वारा सड़क के घर्षण से पार पाने के लिए लगता है।
- यदि g, e तथा n द्वारा क्रमशः गुरुत्वीय, विद्युत-चुंबकीय और नाभिकीय बलों की प्रबलताएँ व्यक्त की जाएँ, तो कुछ दूरी से विलग रहने पर दो इलेक्ट्रॉनों के बीच आरोपित इन बलों के लिए
- e > g > n
- n > e > g
- e > n > g
- g > n > e
- यदि अभिलंब बल दुगुना कर दिया जाए तो घर्षण गुणांक
- दुगुना हो जाएगा
- आधा हो जाएगा
- समान रहेगा
- चौगुना हो जाएगा
- एक चिकने क्षैतिज टेबुल पर एक हलके धागे के प्रत्येक सिरे को 5 N के बल से खींचकर तान दिया गया है। धागे के मध्यबिंदु पर तनाव का मान होगा
- 10 N
- 5 N
- शून्य
- अनंत
- 150 किग्रा की एक तोप से 1.5 किग्रा का एक गोला दागा जाता है जो 60 मी/से के वेग से निकलता है। तोप के पीछे हटने का वेग होगा।
- इनमें से कोई नहीं
- 0.6 मी/से
- 6 मी/से
- 10.5 मी/से
- यदि m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो पिंडों के टकराने के पहले उनके वेग क्रमशः u1 तथा u2 एवं टक्कर के बाद उन पिंडों के वेग क्रमशः v1 तथा v2 हों, तो संवेग-संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार निम्नांकित में कौन मान्य है?
- m1u1 − m2u2 = m1v1 − m2v2
- m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2
- m1u1 − m2u2 = m1v1 + m2v2
- m1u1 + m2u2 = m1v1 − m2v2
- इनमें से कौन सा कथन गलत है?
- लोटनिक घर्षण, सर्पी घर्षण से कम होता है
- सर्पी घर्षण गुणांक की विमा लंबाई होती है
- घर्षण बल सापेक्ष गति का विरोध करता है
- स्थैतिक घर्षण का सीमांत मान अभिलंब प्रतिक्रिया के सीधे आनुपातिक होता है
- किसी m द्रव्यमान की वस्तु जि सका वेग v है, का संवेग होगा
- mv
- (mv)2
- mv2
mv2
- 10 किलोग्राम द्रव्यमान का एक ब्लॉक 1 मीटर त्रिज्या वाले एक खोखले बेलनाकार ड्रम की आंतरिक दीवार के संपर्क में है। ब्लॉक और सिलेंडर की आंतरिक दीवार के बीच घर्षण गुणांक 0.1 है। जब सिलेंडर ऊर्ध्वाधर हो और अपने अक्ष पर घूम रहा हो, तो ब्लॉक को स्थिर रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम कोणीय वेग होगा (g = 10 m/s2)
rad/s- 10 rad/s
rad/s- 10π rad/s
- कोई अचर बल 0.68 kg द्रव्यमान के किसी पिंड में 0.08 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करता है, तो बल का परिमाण है
- 0.048 N
- 0 N
- 48 N
- 0.48 N
- जड़त्व का गुण
- केवल गति शील वस्तु में होता है
- किसी-किसी वस्तु में होता है
- प्रत्येक वस्तु में होता है
- किसी भी वस्तु में नहीं होता है
- रेल की पटरियाँ किनारों से क्यों मुड़ी होती हैं?
- रेलगाड़ी को अन्दर की ओर गिरने से बचाने के लिए
- रेलगाड़ी के भार के ऊर्ध्वाधर घटक से आवश्यक अपकेन्द्री बल प्राप्त करने के लिए
- रेलगाड़ी के पहियों और पटरियों के बीच किसी भी प्रकार का घर्षण बल उत्पन्न नहीं करने के लिए
- रेलगाड़ी के भार के क्षैतिज घटक से आवश्यक अभिकेन्द्री बल प्राप्त करने के लिए
- 150 g द्रव्यमान को किसी क्रिकेट की गेंद का प्राराभिक वेग
= (3 + 4 ) ms−1 और हिट होने के बाद अंतिम वेग = − (3 + 4 ) ms−1 है। हिट होने की प्रक्रिया में हस्तांतरित संवेग का परिमाण है –- 0.75 kg ms−1
- 14 kg ms−1
- 1.5 kg ms−1
- शून्य
- यदि गति करने के लिए स्वतंत्र 1 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु पर 1 N बल लगाया जाए, तो वह
- 1 m/s2 के त्वरण से गति शील होगी
- 1 km/s की चाल से गति करेगी
- 10 m/s2 के त्वरण से गति शील होगी
- 1 m/s की चाल से गति करेगी
- 30 N का एक बल 6 kg द्रव्यमान की वस्तु पर 2 s तक कार्य करता है, तो वस्तु का त्वरण होगा
- 0 (शून्य)
- 30 m/s2
- 6 m/s2
- 5 m/s2
- चरम घर्षण, स्थिर घर्षण का
- न्यूनतम मान है
- आधा है
- दुगुना है
- महत्तम मान है
- 0.06 kg की एक गोली एक पिस्टल से 40 m/s के वेग से छोड़ी जाती है। यदि पिस्टल 20 m/s के वेग से पीछे हटती है, तो इसका द्रव्यमान होगा
- 40.06 kg
- 20 kg
- 0.06 kg
- 0.12 kg
- 100 kg द्रव्यमान की एक वस्तु 5 m/s के वेग से चल रही है, तो इसका संवेग (momentum) होगा
- 5 kg m/s
- 105 kg m/s
- 500 kg m/s
- 100 kg m/s
- संतुलन के लिए आवश्यक है
- संवेग का शून्य होन
- गतिज ऊर्जा का शून्य होना
- वेग का शून्य होना
- त्वरण का शून्य होना
- यदि F परिमाण का बल m द्रव्यमान की वस्तु में a त्वरण उत्पन्न करता है, तो
- a ∝
- a ∝
- a = F × m
- a ∝ m
- a ∝
- हॉकी का कोई खि लाड़ी वि पक्षी से बचने के लि ए उत्तर दि शा में जाते-जाते पूर्ववर्ती चाल से ही अचानक पश्चिम की ओर मुड़ जाता है। खि लाड़ी पर लगने वाला बल है :
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में पेशीय बल
- पश्चिम दिशा में घर्षण बल
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में घर्षण
- दक्षिण दिशा में पेशीय बल
- किसी वस्तु के द्रव्यमान, उसके त्वरण तथा उसपर आरोपित बल के बीच क्या संबंध होता है?
- बल = द्रव्यमान + त्वरण
- बल = द्रव्यमान − त्वरण
- बल = द्रव्यमान / त्वरण
- बल = द्रव्यमान × त्वरण
- 3 kg की वस्तु पर यदि 3 N का बल लगता हो, तो उस वस्तु में उत्पन्न त्वरण होगा
- 6 m/s2
- 3 m/s2
- 9 m/s2
- 1 m/s2
- किसी वस्तु के जड़त्व (inertia) की माप होती है
- वस्तु की चाल से
- वस्तु के द्रव्यमान से
- वस्तु कहाँ स्थित है उससे
- इनमें कोई सही नहीं है
- किसी बल्लेबाज द्वारा क्रिकेट की गेंद को मारने पर गेंद जमीन पर लुढ़कती है। कुछ दूरी चलने के पश्चात गेंद रुक जाती है। गेंद रुकने के लिए धीमी होती है, क्योंकि
- गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है
- गेंद पर कोई असंतुलित बल कार्यरत नहीं है, अतः गेंद विरामावस्था में आने के लिए प्रयासरत है
- बल्लेबाज ने गेंद को पर्याप्त प्रयास से हिट नहीं किया है
- वेग गेंद पर लगाए गए बल के समानुपाती है
- एक 20 मी लम्बी छड़ है। इसके दोनों अन्तों पर 8 किग्रा तथा 12 किग्रा भार लटक रहा है, यदि छड़ का भार 6 क्रिग्रा हो, तो सन्तुलन बिन्दु 12 क्रिग्रा भार से कितनी दूरी पर होगा?
- 8.46 मी
- 1.2 मी
- 1.6 मी
- 1.54 मी
- कोई यात्री किसी गतिमान रेलगाडी में एक सिक्का उछालता है जो उसके पीछे गिरता है। इसका यह अर्थ है कि रेलगाड़ी की गति
- त्वरित है
- एकसमान है
- अवमंदित है
- वृत्ताकार पथ के अनुदिश है
- 2 kg द्रव्यमान का कोई पिंड समीकरण x(t) = pt + qt2 + rt3 के अनुसार गति करता है, यहाँ p = 3 ms−1, q = 4 m s−2 और r = 5 m s−3 है। t = 2 s पर पिंड पर लगने वाला बल है –
- 68 N
- 134 N
- 158 N
- 136 N
- एक बंदूक से 0.03 kg की एक गोली 20 m/s के वेग से छोड़ी जाती है। यदि बंदूक 10 m/s के वेग से पीछे हटती हो, तो बंदूक का द्रव्यमान होगा
- 0.06 kg
- 0.04 kg
- 20 kg
- 10 kg
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